आज की सबसे बड़ी सामाजिक आपदा
स्वतंत्रता की सच्ची वेदी पर एक नई शपथ : #भ्रष्टाचार और #चाटुकारिता का बहिष्कार
मित्र सबसे पहले मैं आपको स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बधाई देता हूं। लेकिन मित्र #स्वतंत्रता_दिवस केवल आसमान में तिरंगा फहराने और देशभक्ति के गीत गाने का दिन नहीं है। यह दिन आत्म-मंथन का भी है मित्र !
जिन वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र सौंपा था, उनका सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ नैतिकता, न्याय और योग्यता का सम्मान हो। लेकिन आज, आज़ादी के इतने दशकों बाद, हमें यह स्वीकार करना होगा कि हमारा समाज एक नई और बेहद खतरनाक बीमारी की चपेट में है और वह है #चाटुकारिता_की_बीमारी।
इस स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, यह आवश्यक है कि हम राजनीतिक और सामाजिक गुलामी की इस नई बेड़ियों को तोड़ें और एक कठोर, लेकिन बेहद जरूरी शपथ लें।
"चाटुकारिता: व्यवस्था को खोखला करने वाली दीमक"
आज के समय में चाटुकारिता(जी-हुजूरी) समाज की सबसे बड़ी बीमारी बन चुकी है मित्र। यह केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है, बल्कि यह वह दीमक है जो पूरे सिस्टम को अंदर से खोखला कर रही है।
यह भ्रष्टाचार का पोषक है मित्र, जब हम किसी भ्रष्ट या नकारा व्यक्ति की केवल इसलिए आवभगत करते हैं क्योंकि वह किसी ऊंचे पद पर बैठा है, तो हम अनजाने में उसके भ्रष्टाचार को सामाजिक स्वीकृति दे रहे होते हैं।
"लालच का पर्दा":
चाटुकारिता हमेशा किसी न किसी स्वार्थ या लालच से जन्म लेती है मित्र। अपने छोटे-छोटे फायदों के लिए जब समाज का एक वर्ग सत्य बोलने का साहस खो देता है, तो पूरी व्यवस्था पंगु हो जाती है। जहाँ चाटुकारिता को इनाम मिलता है, वहाँ सच्ची प्रतिभा और ईमानदारी हमेशा हाशिए पर धकेल दी जाती है।
"सच्चे और ईमानदार व्यक्ति का दायित्व"
यह भी उतना ही सत्य है कि चाटुकारिता का पोषण तभी होता है, जब उसे स्वीकार करने वाले लोग मौजूद हों। इसलिए किसी भी सच्चे और ईमानदार व्यक्ति को कभी भी चाटुकारिता पसंद नहीं आनी चाहिए। एक योग्य व्यक्ति को अपने आस-पास कभी भी ऐसे लोगों की फौज नहीं रखनी चाहिए जो केवल उसकी "जी-हुजूरी" करते हों। जो व्यक्ति हर बात में हाँ में हाँ मिलाता है, वह कभी सच्चा हितैषी नहीं हो सकता मित्र।
ऐसे चाटुकार केवल अपने निजी लाभ के लिए जुड़े होते हैं। वे सच को छिपाकर एक ऐसा भ्रम पैदा करते हैं, जो अंततः पतन का कारण बनता है। एक सच्चा लीडर वही है जो अपनी आलोचना सुनने का भी साहस रखता हो।
हमारा संकल्प : तार्किक और नैतिक बहिष्कार
स्वतंत्रता का असली अर्थ है अपने आत्मसम्मान को किसी भी लालच के आगे न झुकने देना। इसलिए, यह समय है कि हम 'पद के सम्मान' और 'व्यक्ति के सम्मान' के बीच के अंतर को समझें।
"कोई व्यक्ति चाहे कितने ही बड़े पद पर क्यों न हो मित्र, अगर वह भ्रष्ट है, चोर है, या अपने काम में नकारा है, तो हम उसका पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार करेंगे। हम किसी भी निजी लालच, भय या स्वार्थ में आकर उसकी चाटुकारिता और आवभगत नहीं करेंगे। साथ ही, यदि हम स्वयं किसी पद पर हैं, तो अपने आस-पास स्वार्थी चाटुकारों को कभी पनपने नहीं देंगे।"
अब सवाल उठता है यह बहिष्कार कैसा हो?
यह बहिष्कार हिंसक या अमर्यादित नहीं, बल्कि तार्किक, मौन और प्रभावशाली होना चाहिए मित्र।भ्रष्ट अधिकारियों या नेताओं को अपने सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाने की प्रथा को बंद करें। जब कोई ऐसा व्यक्ति जो अपनी अयोग्यता या भ्रष्टाचार के लिए जाना जाता है, मंच से बड़ी-बड़ी बातें करे, तो उसकी बातों पर तालियाँ बजाकर उसका अहंकार न बढ़ाएं।
अपने निजी काम जल्दी निकलवाने के लिए भ्रष्ट तंत्र के आगे न झुकें। जब हम अपना लालच छोड़ते हैं, तभी हम किसी की आंखों में आंखें डालकर सच बोलने का साहस जुटा पाते हैं।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
मित्र लोकतंत्र में पद जनता की सेवा के लिए होते हैं। जब समाज चाटुकारिता छोड़कर सवाल पूछना शुरू करेगा, तभी कुर्सी पर बैठे लोगों में यह डर पैदा होगा कि अयोग्यता को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हमें अपने बच्चों का भी ख्याल रखना चाहिए कि हम उन्हें क्या सिखा रहे हैं? क्या हम उन्हें यह सिखाना चाहते हैं कि सफलता के लिए योग्यता नहीं, बल्कि सत्ता की जी-हुजूरी जरूरी है? अगर हम आज खड़े नहीं हुए, तो हमारी आने वाली पीढ़ियां इसे ही जीवन का मूल नियम मान लेंगी दोस्त।
एक नागरिक के तौर पर हमारा सबसे बड़ा आभूषण हमारा आत्मसम्मान है। जब हम किसी नकारा व्यक्ति के सामने सिर झुकाते हैं, तो हम सिर्फ अपना नहीं, बल्कि उस संविधान का भी अपमान करते हैं जिसने हमें समानता का अधिकार दिया है।
स्वतंत्रता दिवस की यह पूर्व संध्या हमसे एक नए स्वतंत्रता संग्राम की मांग कर रही है : #चाटुकारिता_से_स्वतंत्रता। कुर्सी और पद अस्थाई हैं, लेकिन व्यक्ति का चरित्र और समाज की नैतिकता स्थाई होती है। आइए, इस स्वतंत्रता को हम संकल्प लें कि हम अपने आत्मसम्मान को किसी भी लालच के लिए गिरवी नहीं रखेंगे। जो गलत है, उसे गलत कहने का साहस जुटाएंगे, भ्रष्ट लोगों का बहिष्कार करेंगे और अपने आस-पास चाटुकारों के दिखावटी आवरण को कभी पनपने नहीं देंगे।
यही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यही एक सशक्त, स्वच्छ और महान भारत की नींव रखेगा।
आपको मेरे विचार कैसे लगे जरूर बताएं...
जय हिंद! जय मां भारती॥
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#IndependenceDay
#thoughtoftheday
#thoughtsforlife

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